अमित
कुमार,
नई दिल्ली, 3 मार्च
देश
भर से आए सैकड़ों नौजवानों
मजदूरों आंगनबाड़ी महिला कर्मियों ने रोजगार के अधिकार के लिए रामलीला मैदान से संसद
मार्ग तक विशाल रोजगार अधिकार रैली निकाली। रोजगार के अधिकार
को मूलभूत अधिकार में शामिल करने के लिए पिछले 1 साल से देश के अलग-अलग राज्यों में
भगत सिंह राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून लागू करने का अभियान
चला रहे हैं।इनकी सरकार से मांग है कि मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी
₹20,000 मासिक मिले। इस रैली में दिल्ली हरियाणा महाराष्ट्र और बिहार के
अलग-अलग इलाकों से हजारों नौजवान और मजदूर शामिल हुए।
भगत
सिंह राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून संयोजन समिति के सदस्य अजय ने कहा अगर रोजगार
के अधिकार को जीने का अधिकार कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं है। तमाम सरकारें आई और चली गई किंतु आबादी के
अनुपात में रोजगार बढ़ने तो दूर उल्टा घटता चला गया हैं। नई सरकारी नौकरियां नहीं निकल रही है सार्वजनिक क्षेत्र
की बर्बादी जा रही है। केंद्र और राज्यों के स्तर पर लाखों
लाख पद खाली पड़े हैं जिसको लटका कर रखा जाता है। सरकारी भर्तियां करके भी नियुक्ति नहीं देती है। ऐसे में संविधान अनुच्छेद 14 और 21 की गरिमा तभी बनी रह सकती है
जब हर व्यक्ति के पास रोजगार का अधिकार हो।
इस
अभियान की दिल्ली संयोजन
समिति की शिवानी जो दिल्ली स्टेट आंगनवाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर यूनियन की अध्यक्ष है
ने कहा लोगों की बुनियादी जरूरतों से जुड़े से भटकाने के लिए मोदी सरकार ने जंग का
माहौल खड़ा करने की कोशिश की है। चुनाव से
ठीक पहले अब मोदी सरकार द्वारा अंध राष्ट्रवाद से पैदा होने वाले युद्ध होने की कोशिश
की जा रही है। उन्होंने बताया हाल ही में जारी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग
इंडियन इकोनामी की रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में एक करोड़ 90 लाख लोगों की को नौकरियों
से निकाल दिया गया। देशभर के प्राइमरी और अप्पर प्राइमरी अध्यापकों
के करीब 10लाख पद ,पुलिस विभाग में 5,49,025 पद रिक्त पड़े हैं।
दिल्ली
में 2013 में 9.13 लाख रोजगार थे जबकि 2015 में इनकी संख्या 12.22लाख हो गई थी। शिवानी ने
बताया कि आम आदमी पार्टी ने 55हजार खाली पदों को तुरंत भरने
और ठेका प्रथा खत्म करने की बात की थी किंतु रोजगार से जुड़े तमाम मामलों में आम आदमी
पार्टी की सरकार भी औरों से अलग नहीं है।
मजदूर
बिगुल के संपादक अभिनव ने सभा में बात रखते हुए कहा कि पिछले साल 2018 में मोदी सरकार धोने
गजट निकालकर इंडस्ट्रियल एंप्लॉयमेंट स्टैंडिंग ऑर्डर्स सेंट्रल रूल्स 5946 में बदलाव
कर टैक्सटाइल और कपड़ा उद्योग में निहित अधिक रोजगार को समाप्त कर दिया है जिसके बाद
कारखानेदार जब चाहे जिसे चाहे काम पर रखे और जब मन चाहे बिना
किसी नोटिस के काम से बाहर निकाल
सकते हैं।
प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों का ज्ञापन प्रधानमंत्री, केंद्रीय श्रम मंत्री, दिल्ली के मुख्यमंत्री,
दिल्ली के श्रम मंत्री को सौंपा और उनसे अपील किया कि बिना किसी
विलंब के इन मांगों को संज्ञान में लेकर तुरंत उन्हें पूरा करने के दिशा में कदम उठाए।इस रैली में नौजवान भारत सभा ,दिशा छात्र संगठन
,बिगुल मजदूर दस्तां, दिल्ली स्टेट
आंगनवाड़ी वर्कर एंड हेल्पर यूनियन अन्य संगठनों ने भाग
लिया।

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