भारत की राजधानी अब दिल्ली में नहीं होनी चाहिए ...


मैं बनारस हिंदूू विश्वविद्यालय का छात्र हूं साथ ही मैं सिविल की तैयारी भी करता हु। जो हमारे बिहार और पड़ोसी यूपी में लाखों नौजवानों का सपना होता है अफसर बनना है। 

खैर इसे छोड़िए हम चलते है शीर्षक की ओर आज मैं क्षेत्रीय दल और क्षेत्रीय दलों के उदय का कारण पढ़ रहा था। कैसे क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय दलों को प्रभावित कर रहे है , चाहे वह बिहार हो या कर्नाटक या फिर तमिलनाडु। इसमें मुझे क्षेत्रीय दलों के उदय का एक बड़ा प्रमुख कारण केंद्र की उतरी भारत की प्रधानता एक बड़ा कारण रहा। केंद्र में चाहे जो भी सरकार रही हो प्रत्येक सरकार का फोकस उत्तरप्रदेश ,बिहार जैसे राज्यों में लोकसभा की सीटो के कारण यहां उनका ध्यान हमेशा अपनी स्थिति मजबूत करने में लगी रहती है, इससे दक्षिण भारतीय राज्यों की उपेक्षा की बात की जाती है। जबकि तमिलनाडु में बिहार जितनी ही लोकसभा सीट है। महाराष्ट्र में भी कमोबेश यही स्थिति है ।

मेरा मानना है इसमें राजधानी परिवर्तन एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है । उत्तरप्रदेश और बिहार की दूरी दिल्ली से कम है । यूपी का तो दिल्ली से सीमा ही साझा होता है ।

आगे जारी है .......

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